सतना वनमंडल में तीन माह के भीतर 257 गिद्ध बढ़कर संख्या 1046 पहुंच गई है। बरौंधा और चित्रकूट गिद्धों के प्रमुख आश्रय बने हैं, जबकि 108 अवयस्क गिद्धों की मौजूदगी सफल प्रजनन का संकेत दे रही है।
सतना और मैहर में होने वाली गिद्ध गणना में इस बार हिमालयी, यूरेशियन और काला गिद्ध नजर नहीं आएंगे। गर्मी बढ़ने के साथ प्रवासी प्रजातियां लौट चुकी हैं, जबकि स्थानीय गिद्धों की आबादी और प्रजनन पर विशेष फोकस रहेगा।
सतना वनमंडल ने गर्मी में बढ़ती वनाग्नि से बचाव के लिए रिकॉर्ड स्तर पर 2246 किलोमीटर फायर लाइन काटी। सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाकर जंगल और पर्यावरण संरक्षण की ठोस व्यवस्था की गई।
सतना और मैहर वनमंडल की 151 बीटों में अखिल भारतीय बाघ गणना का पहला चरण शुरू हुआ। मझगवां में वयस्क टाइगर के पगमार्क, अन्य क्षेत्रों में तेंदुआ, हायना और भालू के प्रमाण मिले, जो जंगलों के सुरक्षित ठिकाना बनने का संकेत हैं।
















